Jo Ghar Bare Aapna [In Hindi ] by Osho

यह पुस्तक भीतर के 'घर' को खोजने और उसमें टिकने की बात करती है—सामाजिक शर्तों, पहचान और बाहरी अपेक्षाओं के बोझ को छोड़कर सचेत, ध्यानमग्न और स्वतंत्र आत्म-होने का मार्ग दिखाती है। लेखक ध्यान, मौन और आत्म-निरीक्षण के माध्यम से असली सुरक्षा और प्रेम बाहर की वस्तुओं में नहीं, बल्कि जागरूक स्वीकृति और आंतरिक शांति में मिलने का अनुभव कराते हैं, सरल उपदेशों और दृष्टांतों से पाठक को अपने भीतर का स्थायी, सुखदायक स्थान खोजने की प्रेरणा दी जाती है। अंततः संदेश यह है कि जब कोई अपने अंदर का घर पा लेता है तो जीवन सहज, पूरेपन और प्रेम से भर जाता है।

Published
Unknown
Nationality
Indian
Length
Unknown
Pages
Unknown
Original Language
Hindi
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Alternate Titles
None

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